मेरे नन्हें फ़रिश्ते …

कुछ नन्हीं हाथों के बीच, मैंने अपने उँगलियों को महसूस किया, कौतुहल में तुमने कस रखे थे अपने हाथ, यूँ पहली बार छुआ था मैंने तुमको ! बहुत मासूम सा …

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कई अधूरी कवितायेँ है ….

कई अधूरी कवितायेँ है पड़ी, कुछ की लिखावटें धुल गयी, कुछ की स्याही फीकी हो गयी ! कुछ शब्दें थी जो हर सुबह आस पास लिपट जाती थी जैसे वो …

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