पलायन क्यों ??
पलायन क्यों … साढ़े साती सुबह, अलसाती कम्बल, कोई गीत की धुन टकराएँ ऐसे.. तन से मन को वहाँ खीच ले गए जैसे, है ये कौन सी, व्यथा या झूठा …
पलायन क्यों ?? Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
पलायन क्यों … साढ़े साती सुबह, अलसाती कम्बल, कोई गीत की धुन टकराएँ ऐसे.. तन से मन को वहाँ खीच ले गए जैसे, है ये कौन सी, व्यथा या झूठा …
पलायन क्यों ?? Read More
मेरे सपनों को जलने दे, यूँ ही मुझे सुलगने दे ! तेरी नियत से क्या वास्ता मेरा, तू पत्थर है, हर कदम गिरने वाला, में इंसान हूँ हर पल सम्हलने …
इंसान हूँ हर पल सम्हलने वाला Read More
चहुतेरे कूके कोयल, बहका बहका शिशिर, महका महका बसंत, चहका चहका फाल्गुन ! गलीचे में छुपा गम ही गम, कहना कैसा १०० भी है कम, [ कुछ आती घर की …
रंग फीका फाल्गुन ! Read More
शाम की धमाचौकरी को एक फटकार विराम लगाती थी, पैर पखारे सब लालटेन तले अपनी टोली सी बन जाती थी! जोर जोर से पड़ते थे, हिंदी की किताबे.. लगता था …
लालटेन तले.. ! Read More
Quiet between the four walls, My Hand covered lament eyes, It is a city where dreams decorated, Why this city shatter my all dreams.. An acquaintance that was left behind, …
Silent Samurai Read MoreAnother Day Spent, So After a long while Today I again joined my team on Whiteboard Session, and today explored the discussion about social documents (PDF, Presentations, PPT’s, Brochure) submissions, …
Few Things to Follow Before You Go For Social Document Submissions Read More