प्रकृति की ओर ..
दूर क्षितिज के एक छोड़ पर नदी किनारे शाम ढलती हुई ऊपर चाँद की दस्तक है ऐसे जैसे ठिठक गया है वक़्त रात और दिन के बीच कहीं इस अनवरत …
प्रकृति की ओर .. Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
दूर क्षितिज के एक छोड़ पर नदी किनारे शाम ढलती हुई ऊपर चाँद की दस्तक है ऐसे जैसे ठिठक गया है वक़्त रात और दिन के बीच कहीं इस अनवरत …
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कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा की जिंदगी “Resident Evil” जैसी हो जाएगी । T- virus या Corona हम इंसान शायद जानते थे ऐसा कुछ हो सकता है, आज …
वो सुबह कभी तो आयेगी … Read More
बीतते दिन का मंजर ऐसा है , जैसे उम्र पतझड़ सी जिंदगी । बोझिल मन ऐसा होता, जैसे शाम उतर आयी हो सीने में । झुरमुटों में कैद दिन का …
बीतते दिन का मंजर … Read More
21वी सदी में तकनीक हमारे जीवन के हर पहलु में व्याप्त है, शिक्षा जगत भी तकनीक के अनुप्रयोगों से अछूता नहीं रहा | नामांकन से लेकर परीक्षा परिणाम तक मोबाइल …
उच्च शिक्षा में तकनीक का समावेश … Read More
हम जब किसी दूसरे शहर में जाते और वहाँ रहने लगते, वहाँ की गलियाँ, वहाँ की रातें, मिलते जुलते लोग, अजनबी रास्तों के साथी और बीता वक़्त एक यादों का …
यायावर .. Read More
गैस पानी की लाइन में, हम कागज़ लेकर जायेंगे ! मुफ्त की सब्सिडी पाने को, हम कागज़ को दिखायेंगे ! दुष्प्रचार को करने को, मुँह ढक-ढक कर आयेंगे ! मेट्रो-बस …
हम जन-गण-मन को गायेंगे …. Read More