तुम भी कभी बहुत बोलते थे….
बातों का सिलसिला अब वैसा नहीं चलता, लम्बी फेहरिस्त होती थी बातों की, मैं पहले तो मैं पहले की तकरार, अब रुक रुक कर कभी कभार मैं कुछ पूछता, और …
तुम भी कभी बहुत बोलते थे…. Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
बातों का सिलसिला अब वैसा नहीं चलता, लम्बी फेहरिस्त होती थी बातों की, मैं पहले तो मैं पहले की तकरार, अब रुक रुक कर कभी कभार मैं कुछ पूछता, और …
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सड़कों के भी पाँव पखारे जाने लगे, लगता है नेता जी दौरे पर आने लगे ! लग गए विश्वकर्मा अब बनाने में पुल पुलिया नेताजी की गाड़ी जब चली जनता …
नेता जी – #MicroPoetry Read More
बुझते अलाव सा नहीं… दहकते आग सा बन, दृढ प्रतिज्ञ बढ़ो ऐसे, जीवन के विस्तार को बुन, थकन पाँव में या लगे कांटे, रुकना न तू अपनी रफ्तार को चुन, …
नव वर्ष के नए नभ में … Read More
बालों के गुच्छों में एक चाँद है, जो कंधे पर सर रखके, सुकून के तरीके तलाशता है, सुबह सुबह घूँघट डाले आधे चेहरे तक, बरामदे पर धीमे क़दमों से चलती …
नया चाँद … Read More
कुछ दिन जब तुम नहीं बोलते, कुछ दिनों की चुप्पी होती, फिर बोलने लगती हर चीजें तुम्हारी तरह । सुबह सुबह खिड़की के पर्दो से झाँकती है धुप, तुम्हारी शक्ल …
कुछ दिन जब … Read More
Autumn marks the transition from summer into Winter ….. किसे न इश्क़ हो इस मौसम से ? ढलती रात अभी की, जैसे हवायें खुले खुले बदन से टकराकर अटखेली करती …
किसे न इश्क़ हो इस मौसम से ? #AutumnDays Read More