मेरे नन्हें फ़रिश्ते …
कुछ नन्हीं हाथों के बीच, मैंने अपने उँगलियों को महसूस किया, कौतुहल में तुमने कस रखे थे अपने हाथ, यूँ पहली बार छुआ था मैंने तुमको ! बहुत मासूम सा …
मेरे नन्हें फ़रिश्ते … Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
कुछ नन्हीं हाथों के बीच, मैंने अपने उँगलियों को महसूस किया, कौतुहल में तुमने कस रखे थे अपने हाथ, यूँ पहली बार छुआ था मैंने तुमको ! बहुत मासूम सा …
मेरे नन्हें फ़रिश्ते … Read More
अब सुबह की दो बातें, और रातों में उलझनों का बयाँ, क्या शायद तकलीफ दे रही थी ! कुछ दिन पहले ही तो खामोशी के, कई परतों को खोला था …
अधूरा अक्स .. Read More
कई अधूरी कवितायेँ है पड़ी, कुछ की लिखावटें धुल गयी, कुछ की स्याही फीकी हो गयी ! कुछ शब्दें थी जो हर सुबह आस पास लिपट जाती थी जैसे वो …
कई अधूरी कवितायेँ है …. Read More
दिन बोझिल हो बेजार जब, तन कुछ भी ना कहता, कुछ ख्वाबों को इस रात का, जब इक पनाह है मिलता ! सुबह फिर वही वैसी ही होगी, तब ही …
जीवन ऐसे ही बढ़ता !! Read More
बचपन की निश्छल अल्हरता को, को कभी झुँझलाहट बनते देखा ! जो खुल के भी कभी रोते थे, उसे चुप हो के सिसकते देखा ! किसी आँगन में जो खेला …
एक गुड़िया परायी -२ Read More
It’s Now Insanity.. No Backdrop of infancy! Lost the summer break; No fairy tale & cartoons; No Trip To New sites.. Now No Mid Day Humor; All went to memoirs …
It’s Now Insanity.. Poetry of Summer memoirs !! Read More