ये शहर कुछ कहता …
कभी शहर को कहते सुना है ; बड़े महानगरों में दब जाती है आवाज मोटर गाड़ी और कल कारखानों के शोर में लेकिन अपने शहर को सुनिए मंदिरों की आरती, …
ये शहर कुछ कहता … Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
कभी शहर को कहते सुना है ; बड़े महानगरों में दब जाती है आवाज मोटर गाड़ी और कल कारखानों के शोर में लेकिन अपने शहर को सुनिए मंदिरों की आरती, …
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प्रकृति को महसूस करें तो कितने ही जीवन रंग इसमें छुपे है ; मानसून की बारिश रोज ही रुक रुक के होती, एक लम्बी उमस के दिनों के बाद जब …
बारिश … Read More
जिद मैंने भी और तुमने भी कर ली ; रुठने के कोई बहाने नहीं थे ; थी तो एक जिद; तुम्हारे पास भी और हमारे पास ! मैंने जिद की …
जिद …. Read More
कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना बाबू मोशाय सादे कुर्ते पैजामे में गलियों से जाते हुए ; और लोग उन्हें देखकर बातें बनाते हुए ! कहीं न …
कुछ तो लोग कहेंगे … Read More
एक आदत सी इधर से डाली है, रोज ऊपरी मंजिल पर आ मैं, पेड़ की झुरमुटों में चाँद देखा करता, एक दिन पूरा था तुम्हारी तरह, हजारों सितारों के बीच …
चाँद और तुम ….. Read More
दुरी है या खाई है फर्क मालूम ही नहीं पड़ता ; गिने चुने महानगर तक सिमट कर रह गया है देश ; खबरें वहीँ की वहीँ बनती है वहीँ संवरती …
महानगर की ओर … Read More