गिरह – Knot of Life : #Night & #Pen !
गिरह ऐसी भी नहीं थी की टूट जाती, हाँ कुछ बन्धन जो वक्त, मायूसी, खामोशी के थे ..सब आजाद है अब ! मैं इस इल्जाम का इतना भी हक़दार नहीं …
गिरह – Knot of Life : #Night & #Pen ! Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
गिरह ऐसी भी नहीं थी की टूट जाती, हाँ कुछ बन्धन जो वक्त, मायूसी, खामोशी के थे ..सब आजाद है अब ! मैं इस इल्जाम का इतना भी हक़दार नहीं …
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किसी ख़ामोशी को लौटते देखा है ; वैसे ही लिबास में ; पुराने लिबास में । हाँ सजे संवरे .. बिना किसी आहट के ; फिर नजरों के सामने पुनः …
ख़ामोशी को लौटते देखा … Quietness Returns Read More
नये नये कपड़ों में लिपटकर चला आता ; वही पुराना जिस्म फिर से संवर जाता । उतार कर हर तकलीफे वो इस तरफ आता; कुछ पल की उम्मीदें अपने साथ …
पुराना जिस्म .. Read More
एक कैनवास मन में बनता है ; उस जगह जाकर लगता कुछ देर और रुक पाता तो तस्वीर इसकी जेहन में पूरी सी बैठ जाती ! पर उस रस्ते के …
शब्दों का कैनवास – Words on Canvas (Night & Pen) : #SK Read More
{महानगर बसेरा है आगंतुक प्रवासी अनेकों लोगो को – छुट्टियों में घर को लौटना फिर महानगर की भीड़ में शामिल होना; कुछ जो अभ्यस्त है आने जाने की प्रक्रिया से …
लौट के यादें शहर को आई – Autumn Back To The City Read More
परछाई सी थी साथ साथ चलता मालूम होता था ; जैसे एकपल हाथ छू गया होगा तेज क़दमों में ; तूने समझा उसकी साजिश सजा में हाथ छुड़ा लिया ; …
परछाइयाँ – Shadow of a Soul Read More