अंतिम परिभाषा ….
इस अनंत सफ़र की अंतिम परिभाषा क्या है ? सोच रखा है .. अपनी बात मनवाने की जिद कर, कुछ क्यों नही लगा ऐसा कभी ? स्वार्थ भर आया है …
अंतिम परिभाषा …. Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
इस अनंत सफ़र की अंतिम परिभाषा क्या है ? सोच रखा है .. अपनी बात मनवाने की जिद कर, कुछ क्यों नही लगा ऐसा कभी ? स्वार्थ भर आया है …
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In Between Overwhelming chaos of living.. We always try to understand life… And every time wondering with upshot, it not like that as exist in thoughts… it comes with new …
Overwhelming chaos of living – My Quotes Read More
** मनसा वाचा कर्मणा** एक प्रगतिशाल चिंतन के लिए जरुरी है – विरोध ! ! अगर आपका विरोध नहीं हो रहा तो, तो शायद आप किसी कार्य में प्रगतिशील नहीं …
** मनसा वाचा कर्मणा** Read More
वो काफिर मंदिर की सीढ़ियों तक ही रहता, नीचे वहीँ सोचता टटोलता खुद को तलाशता ! तृष्णा थी उसके पास नजाने कैसी .. अनंत संवेदनाओं से भरी लिपटी ! हवायें …
काफ़िर – 2 …. !! Read More
See The Hanging Wind Chimes, Their Sticks collide to create jingle, They distant to deliver loveliness ! Wind Chimes laying on Windows, Witness of mesmerize morning, Reminiscence of shaded evenings …
Wind Chimes – Micro Poetry Read More
इक ऐसी ही शाम रोजमर्रा की .. नियत समय से मेट्रो में अपने गंतव्य की ओर जाने को आतुर और दुनिया भर की बातों की धुनी जमाए अपने कार्यस्थल के …
एन इवनिंग इन मेट्रो – मेट्रोनामा !! Read More