गंतव्यविहीन … In Night & Pen
लंबी समांतर रेखा खींचता हुआ ये काफिला जिंदगी का बहुत दूर हो आया था; ऐसे कितने दफा कोशिश की, साथ साथ चलती ये रेखाएँ काट के निकल जाये, अपने गंतव्य …
गंतव्यविहीन … In Night & Pen Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
लंबी समांतर रेखा खींचता हुआ ये काफिला जिंदगी का बहुत दूर हो आया था; ऐसे कितने दफा कोशिश की, साथ साथ चलती ये रेखाएँ काट के निकल जाये, अपने गंतव्य …
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सर्द हवाओं ने ये महसूस कराया; फ़िक्र लौट आयी थी उनकी आज ! फिर कुछ सरसरी हवा छु गयी होगी, फिर अब बचपन लौट गयी होगी ! ना मानी होगी …
शीत की आँगन ! Read More
मैं अब कैसे शिकायत भी करू तुमसे, तुम खफा हो के कुछ और दूर चले जाओगे ! ये फासले या वक्त की क्या साजिशे थी, कुछ खोने का अहसास अब …
कुछ खोने का अहसास ! Read More
मैं अपनी हर रीत निभा रहा .. जिंदगी तू भी अब साथ दे थोड़ा ! मैं हर सुबह चहक उठता; पर तू शाम तलक मायूस कर देता ! चलो छोड़ …
जिंदगी तू भी अब तो साथ दे थोड़ा !! Read More
जब शब्दें खामोश हो जाती, तब तस्वीरें बोलती, इनमे छुपा होता एक मर्म, एक वक्त .. एक याद .. एक पुकार … एक खामोशी .. एक कला .. एक आत्मा …
जब शब्द खामोश हो – तस्वीरें बोलती : My Paintbrush & Art Collection Read More
बहुत द्वंद और एक बोझ जैसे पर्वतों की श्रृंखला, और रेगिस्तान सी राह में दूर जाता एक राही; विस्तृत अथाह सी राह में कभी इतना पीछे रह जाता; की चलना …
Reprise Something – Night & Pen Read More