सपनों के बुलबुले – Dream Bubbles

बुलबुले बेचते वो राहों पर ..बुलबुले के बदले रोटी !रिश्ता अजीब लगता पर,बहुत संजीदा नाता उसका ! दो चार बुलबुले उड़ाते,बहल जाते राहगीर मुसाफिर,मकसद होता दो चार पैसे !पूछते उम्मीदी …

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थे साथ कभी – All Together ??

इन राहों से कितने बिछड़े,जहाँ हर सुबह महफ़िल बनती थी, पूछते थे खबर हर यारों की, तेरे रंग मेरे रंग बादलों सी सजती,मन सपने बुनती संवरती..और फिर धुँधली सी परती …

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एक साँझ की हलचल – An Evening Swirl

दो झूले और बच्चे कतार में, फीकी हरयाली इस छोटे से बाग में ! पेड़ छोटे, इस शहर की रंगचाल में,दायरा आसमां ने भी समेटा,लंबी लैम्पपोस्टो की आढ़ में ! …

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ख़ामोशी लिपटी थी ….

कुछ यूँ बीती रात लंबी हो चली थी,दबा रखे थे सवाल कई.. तुमसे पूछेगे..!आज कोई फिर आके आवाज दे गया जैसे ! हो फिर मोह कोई तुझसे,या तृष्णा कुछ, जो …

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