सूरज ने दो जगह से उगना शुरु कर दिया …
थोरा ढला ढला,झुका झुका सुबह था आज का, सूरज भी था कहीं खोया था आज मेरी तरह, ठण्ड हवा की थोरी कंप कपी, छु रही थी जैसे ; माँ ने …
सूरज ने दो जगह से उगना शुरु कर दिया … Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
थोरा ढला ढला,झुका झुका सुबह था आज का, सूरज भी था कहीं खोया था आज मेरी तरह, ठण्ड हवा की थोरी कंप कपी, छु रही थी जैसे ; माँ ने …
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यूँ रफ़्तार बहुत ही तेज थी … टुकड़ो टुकड़ो को समेटा.. देखो बन रहा इन्द्रधनुष सा …कुछ रंग थे इस तरह … (चाँद ने क्या लिखा रात की हथेली पर …
इन्द्रधनुषी रंग जिंदगी के …My LifeStream -1 Read More
वक्त के किसी दोराहे पर खरे ! अच्छाई और बुराई के अंतरद्वंद में घिरे ! हरिवंश राय बच्चन जी की कुछ पंकियो को , आप अपने जिंदगी के बहुत करीब …
I am competing with Myself – Life Motivating Poem By हरिवंश राय बच्चन Read More
गर्व हमे की हमने तो भारत भूमि पर जन्म है पाया ,बचपन से ही इस माटी में लोट पोट इठलाया ! जरा देखो कृषक की बातो को, इनके सीनों पर …
गर्व हमे की हमने तो भारत भूमि पर जन्म है पाया ! ! Read More
जीने का कुछ ढंग बदला, हमने भी अपना रंग बदला.. छत पर एंटीना की जगह , अब डिश टीवी ने ले ली.. कपड़े मे T-shirt का चलन बढ़ गया.. पर …
जीने के बदले है ढंग – A Social Media Life ! Read More
सब बिखरा सा .. क्या क्या समेटू इन दो हाथों मे ? वो परेशां थे.. पर उनकी बड़ी ही चाहत थी,हमे आजमाने की ! खामोश हूँ खरा .. देख रहा …
सब बिखरा सा ..More Than A Poem Read More