एक नाव चलाये कागज़ का ही सही ! – A Rainy Thoughts
ऑफिस के खिड़कियों से यूँ ही बाहर होते झमाझम बारिश को देखर मना झूम उठा और कुछ बचपन की यादें ठहर सी गयी …मन में सावन लाने को आतुर बरस …
एक नाव चलाये कागज़ का ही सही ! – A Rainy Thoughts Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
ऑफिस के खिड़कियों से यूँ ही बाहर होते झमाझम बारिश को देखर मना झूम उठा और कुछ बचपन की यादें ठहर सी गयी …मन में सावन लाने को आतुर बरस …
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आज मे अपने गाँव चला … कुछ ममता मिल जाये आँचल की, आज फिर उनको लेने चला ! जिन गलियों मे बीता मेरा बचपन, आज फिर उनको जीने चला ! …
आज मे अपने गाँव चला …Going To Home ! Read More
यूँ बैठे थे की हवाओ ने रुख बदला और कुछ फुहारों ने मन को हर्षित कर दिया और कुछ मन मे आये भाव… देखो बह रही ये कैसी बहार, बरसी …
आई रे आई ये रिमझिम फुहार ! ! – It’s A Rainy Day Read More
अब मुझे कोई इन्तेजार कहाँ ! तेरी मायूसी का ऐतबार कहाँ ! यूँ भागे है किस तरफ तब से , की अब हमे चैन कहाँ ! पिघल जाये ये दिल …
अब मुझे इन्तेजार कहाँ ! – A Poem Read More
तू भी मेरे ठोकरों पर हँस ले , हाथ छोर कर जो चला हु तेरा ! परेशा ना हो मेरी गिरते सम्हलते कदमो पर , कदम जब बढ़ा ही दिया …
तू भी मेरे ठोकरों पर हँस ले – A Thought Read More
शब्दो के दरमियाँ फासले बहुत थे , पर कुछ बातें तो निकली जुबान से ! अनसुनी न थी बातें मेरी , मगर गुस्ताख़ी का नाम दे गये ! यूँ तो …
शब्दो के दरमियाँ फासले बहुत थे – A Random Thoughts Read More