आसमान और कैनवास
मेरे शहर के ऊपर, रोज कोई कैनवास लगाता है, रोज सोचता हूँ देखूँगा उसकी सूरत, वो रोज कुछ न कुछ बना के चुपके से चला जाता, बड़ी बड़ी रंगों की …
आसमान और कैनवास Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
मेरे शहर के ऊपर, रोज कोई कैनवास लगाता है, रोज सोचता हूँ देखूँगा उसकी सूरत, वो रोज कुछ न कुछ बना के चुपके से चला जाता, बड़ी बड़ी रंगों की …
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कितना खुदगर्ज़ दिन है चुपचाप से रोज बीत जाता न शाम से कुछ कहता, और रात तो कबसे खामोश सी है । इन तीनों का कुछ झगड़ा सा है, कोई …
खुदगर्ज़ …. Read More
ऐसे ही बात शुरू हुई जिंदगी और किताब की … सब कुछ कहीं न कहीं सोचा गया होगा, या कोई किताब होगी जिन्दगी की किताब जिसमें लिखा होगा कौन किसके जिन्दगी …
जिंदगी और किताब – Night & Pen Read More
लघु कविता क्षणिकाएँ है जो अनायास ही मष्तिष्क में आती लेकिन इनका जुड़ाव स्तिथि से, यादों से जरूर होता ! Yet Another Part of Two liners Hindi Poetry … #Sujit …
#SK – Two Liners – II Read More
अब कोई नज़्म नहीं लिखूँगा तुमपर देखों ये तुमने क्या कर दिया तुम्हारी नज़्म सा ही हो गया हूँ !! #Randomthoughts वहम था उन चेहरों का हँसना, यकीन यूँ ही …
#SK – Two Liners – I Read More
कुछ सादा फीका फाल्गुन था, तुम आते तो रंग चढ़ता थोड़ा, कुछ नीला पीला गालों पर, बालों से कुछ रंग झरता तेरा ! ऐसे तो हरपल यादों में रंगता, साथ …
तुम आते तो रंग चढ़ता थोड़ा …… Read More