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लाल स्याही … A Treasure !

क्योँ अलग विजाती से बैठे,आँगन के उस पार अकेले,ढोल नगारे कानों से टकरा कर,वहीँ निस्तब्ध से हो चले,गुमसुम से बस तकते उस भीड़ को,हिस्सा जो नहीं उस उत्सव का मैं …

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कभी देखते मेरी नजरों से तो जान पाते – Feel Again

वो शीत की धुप गिरती तुम पर,भिगोती तुझे और चमक जाती,अनेकों लकीरें तेरी चेहरों पर ! कभी देखते मेरी नजरों से तो जान पाते ! उबड़ खाबड़ राहों पर देख …

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फिर बात मेरी .. Yet Again

ये किस जवाब के बदले..फिर कुछ सवाल थे तुम्हारे ! हँस कर ही खामोश हो चले हम..बहल ही गया ना फिर,बात अपना अनेकों इन्तेजार करके ! फिर वही कुछ पुराने …

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पूस के मेले – Winter @ India

लगे खेत में पूस के मेले, सरसों अरहर मस्ती में खेले ! ठीठुरी पुरवा पवन बहके है हौले..अलसी व गेहूँ की बालियाँ डोले ! विहंग तरंग बांस पर झूले,खेत पर …

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एक रात शहर की – Devils of Dark Night …!

जब रात तमस बड़ी गहरी थी,सहमी सी और सुनी थी ! घना अँधेरा धरा पर आता,शहर घना जंगल बन जाता ! मद में विचरते कुंजर वन में,विषधर ब्याल रेंगते राहों …

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