एक साँझ की हलचल – An Evening Swirl
दो झूले और बच्चे कतार में, फीकी हरयाली इस छोटे से बाग में ! पेड़ छोटे, इस शहर की रंगचाल में,दायरा आसमां ने भी समेटा,लंबी लैम्पपोस्टो की आढ़ में ! …
एक साँझ की हलचल – An Evening Swirl Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
दो झूले और बच्चे कतार में, फीकी हरयाली इस छोटे से बाग में ! पेड़ छोटे, इस शहर की रंगचाल में,दायरा आसमां ने भी समेटा,लंबी लैम्पपोस्टो की आढ़ में ! …
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कुछ यूँ बीती रात लंबी हो चली थी,दबा रखे थे सवाल कई.. तुमसे पूछेगे..!आज कोई फिर आके आवाज दे गया जैसे ! हो फिर मोह कोई तुझसे,या तृष्णा कुछ, जो …
ख़ामोशी लिपटी थी …. Read More
सुनी सी ये शाम है अब की,दिन दुपहरी लगती वैशाखी ! कुछ रंग फीके लगते इस जग के,ये मन अपना किस तलाश में भागे, कभी कोसता नाकामी पल को,लगा सपनों …
मन – An Inner Inner Conscience Read More
एक विचार : सोशल मीडिया की आलोचना सोशल मीडिया की आलोचना करना वर्तमान संदर्भ में सर्वथा उचित नही है !हर पक्ष के दो पहलु होते, परमाणु बम सी विध्वंशक शक्ति का …
Social Media Criticism – एक विचार Read More
रात .. बात नही बस सुर्ख काले अंधेरों और दो चार दमकती चाँद तारों की…रात .. बात नही अकेली अँधेरी गलियों और सुनसान सड़कों से गुजर जाने की .. रात …
ये रात …? – A Night Read More
चहकती थी हर उस डाल पर बैठी पंछियाँ, अब पतझर सा लगता , एक ठूंठ सा खरा पेड़ ! बड़े सुने सुने से सुनसान सा प्रतीत होता , ना झूले है उस पर, यूँ …
अमरलता के बेले और पेड़ – 100th Poem Read More