क्योँ नही बहलाती मुझे माँ !
याद उतनी ही है तेरी इस जेहन में बसी,जैसे तेरी उँगलियाँ छु चल पड़ा इन राहों में ! और ना तुने रोका, कुछ तो कहा होता..में इन राहों में चलता …
क्योँ नही बहलाती मुझे माँ ! Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
याद उतनी ही है तेरी इस जेहन में बसी,जैसे तेरी उँगलियाँ छु चल पड़ा इन राहों में ! और ना तुने रोका, कुछ तो कहा होता..में इन राहों में चलता …
क्योँ नही बहलाती मुझे माँ ! Read More
शब्द जब रंग मंच पर उतरे !अपने अपने किरदार को खेले ! में खरा वहाँ मुसकाता रहा, हर उलझन को सुलझाता रहा ! ये आहट किस और से आती है …
Morning Again ..! Read More
एक अल्ल्हर बातें है जैसे, सपने का पलना हो जैसे !अठखेली हवाओं जैसी !बावरी मन चंचल हो जैसी ! आशाओं की डोरी सी !बातें करती पहेली सी, एक तस्वीर …. …
अल्ल्हर बातें ! Read More
एक संगीत कभी सुमधुर तानो भरा,कभी अनसुना विस्मित रागों सना ! एक हँसी कभी खुशी लहरों भरा,कभी व्यंग्य के उपहासो से जना ! एक क्रंदन कभी नयनों में भरा !कभी …
जिंदगी आखिर जिंदगी ही है.. Read More
The Age of Orthodox thinking…But where we stand; Our Country lost the credentials of New Facet of Innovation. Are we facing the Mind Drain or Influenced with Amplification of Physical …
4th Floor Thoughts ! Read More
पलायन क्यों … साढ़े साती सुबह, अलसाती कम्बल, कोई गीत की धुन टकराएँ ऐसे.. तन से मन को वहाँ खीच ले गए जैसे, है ये कौन सी, व्यथा या झूठा …
पलायन क्यों ?? Read More