Blog

नकाबपोश रातें..Midnight Solitude

नकाबपोश रातें रातों सी जिंदगी .. ना संवरती ना बिखरती ! गम था, पर दिखना था संजीदा, नकाबपोश जो भीड़ में खरे थे ! बिखेरी, थोरी सी एक बनाई हुई …

नकाबपोश रातें..Midnight Solitude Read More

एक ख़ामोशी शब्दों पर फैला …

साँझ जो पसरी धुँधला सवेरा, घासों की गठरी, वो मैला कुचैला, मटमैली हाथों में एक छोटा सा थैला, लौटते खेतों से,नित की यही बेला ! बैठे ताकों में नभ भी …

एक ख़ामोशी शब्दों पर फैला … Read More