कल रात की बारिश – A Rainy Night
आज रात काली काली सी, कुछ रंगीली सवाली सी, अँधेरे में चुपके से बादल, छा गए जैसे वो पागल !! बुँदे दिखी बचपन की पहेली, पैर पटक बच्चों सी खेली, …
कल रात की बारिश – A Rainy Night Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
आज रात काली काली सी, कुछ रंगीली सवाली सी, अँधेरे में चुपके से बादल, छा गए जैसे वो पागल !! बुँदे दिखी बचपन की पहेली, पैर पटक बच्चों सी खेली, …
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यह चक्रव्यूह था जिसको ना जाना, और राम ने शायद मन में क्या ठाना ! थे संशय में अर्जुन गांडीव धरे, इस चक्रव्यूह में क्यों राम परे ! हर राह …
इस चक्रव्यूह में क्यों राम परे ? Read More
कुछ यूँ हुआ … हाथों में गुब्बारे थे रंगीले सबके, और कुछ छुपा रखा था खंजर जैसा ! कदम जब जब बढ़े थे हमारे , राह क्यों बन गया था …
हाथों में गुब्बारे थे रंगीले ! Read More
अनजाने में खुद ही खीच ली उम्मीदों की रेखा, अब पार जाना आसान सा नही हो रहा, खुद ही पंख पसारे उड़े थे इन आसमां में कभी, आज सहमे से …
चल दौड़ लगाये एक बार फिर, कहाँ गया तेरा हौसला ?? Read More
पतझरों से उजरे उजरे दिन लगते , दुपहरी है अब लगती विकल सी ! वैसाख के इस रूखे दिन तले, कभी बचपन में सोचा करते थे ! और चुपके आहिस्ता …
वैसाखी दुपहरी ! Read More
खामोश ही सही, पर रहों आसपास बनकर ! बिखर जाओ भले, रह जाओ एक अहसास बनकर ! दूर जाने से किसे कौन रोके, ठहर जाओ बस कुछ याद बनकर ! …
बैठे हो क्यों ख्वाब बन कर ? Read More