दीवार के उस पार खड़ा अपना बचपन ! !
रोज का एक आम दिन …. अभी थोरा ही झुका था सूरज उस सामने पेड़ की झुरमुट में , भागे भागे ऐसे जैसे चार पर टिकी घड़ी, अब रुकेगी नही …
दीवार के उस पार खड़ा अपना बचपन ! ! Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
रोज का एक आम दिन …. अभी थोरा ही झुका था सूरज उस सामने पेड़ की झुरमुट में , भागे भागे ऐसे जैसे चार पर टिकी घड़ी, अब रुकेगी नही …
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आज शाम का अलाव कुछ सुना सा था , न पहले के तरह घेर के उसे बैठा था कोई .. न ही कोई छिरी चर्चा उस अलाव के इर्द गिर्द, …
बाट जोहे सर्द में ठिठुरते है सूने चौपाल .. Read More
दुरी चंद कदमो की, ये कैसा फासला था ! अनजान सिमट कर रह जाता हूँ , ये कैसा आसरा था ! खायालात ख़ामोशी का हाथ थामे चल रहे , कहाँ …
दुरी चंद कदमो की, ये कैसा फासला था ! – On Way of Life Read More
यादों के पत्ते यूँ बिखरे परे है जमीं पर , अब कोई खरखराहट भी नही है इनमे, शायद ओस की बूंदों ने उनकी आँखों को कुछ नम कर दिया हो …
यादों के पत्ते यूँ बिखरे परे है जमीं पर – Life fade as a Leaf Read More
ये रात शर्त लगाये बैठे है नजरे बोझिल करने की.. और हम ख्वाब सजाने की बगावत कर बैठे है … (वक्त के खिलाफ ये कैसी कोशिश ! ! ) यूँ …
उलझते सुलझते बातें जिंदगी के .. My LifeStream -2 Read More
चलो फिर दीप जलाये अपने आँगन मे इसबार, थोरे सुनी परी थी जो गलियां, उन्हें जगाए इस बार, धुल पर चुकी थी, दरख्तों पर उन्हें हटाये इस बार, चलो अपने …
चलो अपने आँगन मे दिवाली मनाये इस बार ! Read More