एक निरीह रात – A Painting
एक निरीह रात .. कुछ बात .. आसमाँ में देखो चाँद की बेरुखी ! ये डर ..भय .. रात का सन्नाटा ! ये पुराने पहाड़ों में दफ्न राज आहिस्ता ! …
एक निरीह रात – A Painting Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
एक निरीह रात .. कुछ बात .. आसमाँ में देखो चाँद की बेरुखी ! ये डर ..भय .. रात का सन्नाटा ! ये पुराने पहाड़ों में दफ्न राज आहिस्ता ! …
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जाँच कभी परताल कभी.. हर राह परे बेहाल सभी .. जो उस रात को तुम जब सोये वहीँ, भाग गया काले धन का राज कहीं ! कोई टोपी वाला आया …
महाभारत तो उसे बनानी थी Read More
यादों की परछाई उभरी ! मेरा मन था छु ले, जा लिपट जाये, और पूछे कुछ सवाल ! मेरी चेतना से परे एक दीवार, या थी भ्रम की कुछ लकीरे …
यादों की परछाई Read More
सुख, चैन , और छिना मेरा शहर, और कहते मेरे खुदा तुम मुझसे .. अब तेरी मेरी बनती नही ! ! (: छूटे साथी और संग, बदला बदला हर रंग, …
अब तेरी मेरी बनती नही ! Read More
स्पंदन मात्र भी नहीं था चेहरों पर, विस्मित ना हुए नयन भी थोड़े भी, बड़ी ही क्षणिक अनुभूति सी थी.. जैसे पथराये से आँखों को छु गयी, एक झलक सहलाती …
आहट सी हुई … Read More
साँझ जो पसरी धुँधला सवेरा, घासों की गठरी, वो मैला कुचैला, मटमैली हाथों में एक छोटा सा थैला, लौटते खेतों से,नित की यही बेला ! बैठे ताकों में नभ भी …
एक ख़ामोशी शब्दों पर फैला … Read More