अमरलता के बेले और पेड़ – 100th Poem
चहकती थी हर उस डाल पर बैठी पंछियाँ, अब पतझर सा लगता , एक ठूंठ सा खरा पेड़ ! बड़े सुने सुने से सुनसान सा प्रतीत होता , ना झूले है उस पर, यूँ …
अमरलता के बेले और पेड़ – 100th Poem Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
चहकती थी हर उस डाल पर बैठी पंछियाँ, अब पतझर सा लगता , एक ठूंठ सा खरा पेड़ ! बड़े सुने सुने से सुनसान सा प्रतीत होता , ना झूले है उस पर, यूँ …
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ये तिमिर घना चहुओर है फैला,हर रोज सोच से रूबरू एक चेहरा,इन शोरों में दर्प फैला है गहरा ! हर तरफ बिफरा है शोर !जो हँस रहे जितना ,उतना उनको …
आयेगा एक दौर – Dawn After Dark Night Read More
खिड़की की ओर नजर ले जाओ,धुँधली सी तस्वीर बनाओ ! देखो तुम जब नजर फिराये,हर चीज भागे बन के पराये ! रातों में फैला कल का एक शोर,पाषाण राहों में …
ये रात की रेल – A Night Train Read More
याद उतनी ही है तेरी इस जेहन में बसी,जैसे तेरी उँगलियाँ छु चल पड़ा इन राहों में ! और ना तुने रोका, कुछ तो कहा होता..में इन राहों में चलता …
क्योँ नही बहलाती मुझे माँ ! Read More
शब्द जब रंग मंच पर उतरे !अपने अपने किरदार को खेले ! में खरा वहाँ मुसकाता रहा, हर उलझन को सुलझाता रहा ! ये आहट किस और से आती है …
Morning Again ..! Read More
एक संगीत कभी सुमधुर तानो भरा,कभी अनसुना विस्मित रागों सना ! एक हँसी कभी खुशी लहरों भरा,कभी व्यंग्य के उपहासो से जना ! एक क्रंदन कभी नयनों में भरा !कभी …
जिंदगी आखिर जिंदगी ही है.. Read More