जमीं पर परा वो पत्ता ..
साख से कैसे छुट गया ये पत्ता, इतना भी पुराना तो रिश्ता नहीं, उम्र भी नहीं था रंग भी थे अभी भरे, दरख्त ने गिरा दिया इसे कैसे ! अनेकों …
जमीं पर परा वो पत्ता .. Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
साख से कैसे छुट गया ये पत्ता, इतना भी पुराना तो रिश्ता नहीं, उम्र भी नहीं था रंग भी थे अभी भरे, दरख्त ने गिरा दिया इसे कैसे ! अनेकों …
जमीं पर परा वो पत्ता .. Read More
मैं कई बार .. कई बार पढ़ रहा हूँ तेरे शब्दों का इक हिस्सा !! पुरे भी नहीं है वो, शायद वक्त की कमी, या मन में उधेरबुन रहा होगा …
शब्दों का इक हिस्सा ! Read More
इन इंसानों के बीच इक इंसान चुनों … दौर बीत जाता हुक्मरानों को बदलने में, आने वाली पीढ़ी का आज अंजाम चुनों !! ना मजहब ना मुक्कदर को चुनों … …
#PledgeToVote – वोट करें ……. !! Read More
उस रास्ते पर वो रोज जा के बैठ जाता, कितनी सुबह पता नहीं .. थपेड़े उसके जिंदगी में ज्यादा होंगे, हर मौसम उसे सर्द सा लगता है, हवायें ना बदलती …
उस रास्ते …. Read More
किसी आँगन की खामोशी को देखा है, ना क़दमों की आहट है कोई, ना पायलों की रुनझुन ही बजते, ना किलकारी ही गूँजती अब, ना कोई रूठता ना रोता है …
किसी आँगन की खामोशी ……. Read More
Do what you think, do what you wish for, this time never come back to you. If you really care for your thoughts forget your fear of failure, every defeat …
Are We Working for Bettered version of ourselves? Read More