कुछ कागजों के बीच – The Memory In My Old Wallet

पुराने बटुए में कुछ कागजों के बीच, कुछ महफूज़ रखा है हमने यादों को ! अनेकों आधे अधूरे लम्हों को, थोरा थोरा जिक्र करके रखा है हमने ! अनेकों छोटे …

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हाथों से फिसल से गये …

किसी रोज की दूसरी बारिश थी, बुँदे इस तरह कांचों से फिसल गये, जैसे धुल गये अवसाद कितने पुराने, लिपटते रहे बूंदें कांचों से कितने भी, रिश्ते कच्चे थे हाथों …

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बहुत बड़ा रंगमंच है ये जिंदगी !!

क्या खुद के विश्वास पर भी .. अविश्वास किया जा सकता ! उहापोह है इस प्रश्न पर .. अंतर्द्वंद भी बोझ भी ! बहुत बड़ा रंगमंच है; इस ओर से उस …

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