दूर से ये रिश्ता …
बहुत दूर से ये रिश्ता, धुँधला धुँधला सा लगता, कभी कभी आकर वो इसे, इक नाम दे जातें है ! हाँ में रुकसत भी नहीं करता, ना ही थामता हूँ …
दूर से ये रिश्ता … Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
बहुत दूर से ये रिश्ता, धुँधला धुँधला सा लगता, कभी कभी आकर वो इसे, इक नाम दे जातें है ! हाँ में रुकसत भी नहीं करता, ना ही थामता हूँ …
दूर से ये रिश्ता … Read More
सुबह किस सफर पर फिर चले, फिर किसी शाम को आज ले लौटे; ना कहीं पँहुचते है ना बढते है; बस अनवरत यूँ ही रोज चलते है ! कुछ …
अनवरत यूँ ही रोज चलते है ! Read More
किसी रोज की दूसरी बारिश थी, बुँदे इस तरह कांचों से फिसल गये, जैसे धुल गये अवसाद कितने पुराने, लिपटते रहे बूंदें कांचों से कितने भी, रिश्ते कच्चे थे हाथों …
हाथों से फिसल से गये … Read More
क्या आसां है उन चिड़ियों को कह देना, उस बरामदे तुम ना चहचहाना अब; अब अजनबी सा वो मकान हो गया है; सुबह को भी बनाना मुश्किल ही है, चेहरों …
Insane Life … Read More
क्या खुद के विश्वास पर भी .. अविश्वास किया जा सकता ! उहापोह है इस प्रश्न पर .. अंतर्द्वंद भी बोझ भी ! बहुत बड़ा रंगमंच है; इस ओर से उस …
बहुत बड़ा रंगमंच है ये जिंदगी !! Read More
बहुत ही अदभुत मेला लगा है इस रियासत में.. इक राहगीर ने चलते हुए पूछा क्या कोई उत्सव है; भाई पुरे पाँच साल के बाद ये आया है, कहने वाले …
चुनाव सन माइनस २०१४ … Read More