शीत की आँगन !
सर्द हवाओं ने ये महसूस कराया; फ़िक्र लौट आयी थी उनकी आज ! फिर कुछ सरसरी हवा छु गयी होगी, फिर अब बचपन लौट गयी होगी ! ना मानी होगी …
शीत की आँगन ! Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
सर्द हवाओं ने ये महसूस कराया; फ़िक्र लौट आयी थी उनकी आज ! फिर कुछ सरसरी हवा छु गयी होगी, फिर अब बचपन लौट गयी होगी ! ना मानी होगी …
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मैं अब कैसे शिकायत भी करू तुमसे, तुम खफा हो के कुछ और दूर चले जाओगे ! ये फासले या वक्त की क्या साजिशे थी, कुछ खोने का अहसास अब …
कुछ खोने का अहसास ! Read More
मैं अपनी हर रीत निभा रहा .. जिंदगी तू भी अब साथ दे थोड़ा ! मैं हर सुबह चहक उठता; पर तू शाम तलक मायूस कर देता ! चलो छोड़ …
जिंदगी तू भी अब तो साथ दे थोड़ा !! Read More
जब शब्दें खामोश हो जाती, तब तस्वीरें बोलती, इनमे छुपा होता एक मर्म, एक वक्त .. एक याद .. एक पुकार … एक खामोशी .. एक कला .. एक आत्मा …
जब शब्द खामोश हो – तस्वीरें बोलती : My Paintbrush & Art Collection Read More
बहुत द्वंद और एक बोझ जैसे पर्वतों की श्रृंखला, और रेगिस्तान सी राह में दूर जाता एक राही; विस्तृत अथाह सी राह में कभी इतना पीछे रह जाता; की चलना …
Reprise Something – Night & Pen Read More
कुछ टूटे हुए काँच खिड़कियों के, जैसे सर्द हवाओं ने रुख देखा उसमें ! आधे ऊँघे परे पेड़ कुछ दुरी पर, और साथ उसके आसरे अंदर खोये हुए, लिपटी चुपचाप …
दूसरी नींद Read More