लब्जों को ढील दो ….
थोड़ा लब्जों को ढील दो ; आके मुझसे वो बातें कर ले ; तेरे कहने पर ही वो आयेंगे ; जाने तुम आँखें दिखाते होगे; किसी पराये के तरह वो …
लब्जों को ढील दो …. Read MoreThe Life Writer & Insane Poet
थोड़ा लब्जों को ढील दो ; आके मुझसे वो बातें कर ले ; तेरे कहने पर ही वो आयेंगे ; जाने तुम आँखें दिखाते होगे; किसी पराये के तरह वो …
लब्जों को ढील दो …. Read More
NDTV के एक रिपोर्ट से प्रेरित ~ रोज एक जैसी रोजमर्रा की जिंदगी, वही वक़्त से पहुँचने की रोज फ़िक्र तो वापस समय पर आने की कोशिश ! एक पाश …
रोजमर्रा …. Read More
लाइक की दुनिया कितनी बड़ी हो गयी है न ; रोज फोटो पर लाइक, उदासी पर लाइक, रोने पर भी लाइक, लाइक लाइक जैसे सब हाल चाल पूछ रहे फोटो …
लाइक – इनबॉक्स लव (Inbox Love ~10 ) Read More
शहर के उस ओर का भूभाग, जहाँ हर साल बाढ़ आता, घर बह जाते, सारा जमीं समंदर हो जाता, फिर भी हौसला है उन लोगों का फिर उजड़े को बसाते और …
हौसलें है .. सब रवानी देखते है ! Read More
बारिश, रात और भींगे मुंडेरों से टपकती है बूंदें ही नहीं , अनेकों पुरानी यादें भी रिसती रहती है कोनों कोनों से ! वो पुरानी खिड़की जिसके फांकों से एक …
बारिश .. सूनी सूनी ! Read More
बारिश .. छोटा शहर तो तंग हो जाता रोज रोज के इन छीटों से ; हर सड़क हर गलियाँ सनी हुई सी, ऊँघती हुई पुरानी बिल्डिंगें टूटे टूटे दरारों में …
संवेदना …. Read More